आपके के साथ भी, जीवन के बाद भी।

हमारी यह सेवा उन लोगों को समर्पित है जो जीवन के अंतिम पड़ाव में अकेले होते हैं। 'ओम संकल्प' अंतिम संस्कार की सभी विधियाँ पूरे सम्मान और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ सम्पन्न कराता है। यह सेवा उन व्यक्तियों के लिए भी है जो अपने जाने के बाद अपने अंतिम संस्कार को धार्मिक विधि-विधान से करवाना चाहते हैं।

ॐ हमारी सेवाएँ – संकल्प से सिद्धि तक ॐ

हमारा उद्देश्य

हम मानते हैं कि मृत्यु केवल एक शारीरिक यात्रा का अंत नहीं, बल्कि आत्मा की नई यात्रा की शुरुआत होती है। हर व्यक्ति को सम्मानजनक अंतिम संस्कार और मोक्ष प्राप्त करने का अधिकार है।

हमारा संकल्प है कि कोई भी मृत व्यक्ति लावारिस न रहे और उसकी अंतिम यात्रा गरिमामय तरीके से पूरी हो।

“अंतिम सफर में भी कोई अकेला न रहे – यही हमारा संकल्प है!”

शास्त्रों में हमारे इस प्रयास का प्रमाण

1. गरुड़ पुराण (प्रेतकल्प – अध्याय 10, श्लोक 26-27)

यदि प्रेतस्य कर्ता न स्याद् दायादो वा जनोऽपि वा।
राजा वा राजमात्यो वा स प्रेतकार्यं समाचरेत्॥

अर्थ: यदि मृत व्यक्ति का कोई कर्ता, दायाद या संबंधी न हो, तो राजा या समाज का प्रतिनिधि उसका अंतिम संस्कार करवाए।

संदर्भ: यह श्लोक समाज की जिम्मेदारी को दर्शाता है, जिसका आधुनिक स्वरूप ‘OMSankalp’ जैसी संस्थाएँ निभा रही हैं।

2. मनुस्मृति (अध्याय 5, श्लोक 92)

दत्त्वा चोद्दिश्य विधिवत् पितृभ्यः पिण्डदानतः।

अर्थ: संतान न होने पर भी यदि कोई श्रद्धापूर्वक पिंडदान करता है, तो पितरों को शुद्धि प्राप्त होती है।

संदर्भ: यह प्रमाणित करता है कि संकल्प के साथ कोई भी व्यक्ति पिंडदान कर सकता है।

3. महाभारत (अनुशासन पर्व – अध्याय 88, श्लोक 7-8)

यस्य नास्ति स्वयं श्रद्धा न च सन्ततिरेव च।

अर्थ: संतान न होने पर मित्र, शिष्य या कोई भी श्रद्धा से श्राद्ध कर्म कर सकता है।

संदर्भ: यह श्लोक संकल्प द्वारा किए गए श्राद्ध को पूर्ण मान्यता देता है।

4. याज्ञवल्क्य स्मृति (अध्याय 1, श्लोक 217)

अपुत्रस्य कृतं श्राद्धं सुतवत् फलदायकम्।

अर्थ: किसी भी शुभचित्त व्यक्ति द्वारा किया गया श्राद्ध पुत्र के समान फलदायक होता है।

5. अपस्तंब धर्मसूत्र (श्लोक 4.5.15-16)

धर्मः कर्तव्यो नृभिः सर्वदैव।

अर्थ: हर व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य अनुसार पितृ कर्म करना चाहिए।

आपके साथ भी, जीवन के बाद भी"– अंतिम यात्रा की सम्मानजनक जिम्मेदारी

कुछ लोग जीवन में ऐसे मोड़ पर होते हैं, जहाँ अपनों का साथ छूट जाता है, या वंश में कोई नहीं होता। ऐसे में, उनकी अंतिम यात्रा की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?

वे लोग जो पूरी तरह अकेले हैं (Unclaimed Individuals)

ऐसे लोग जिनका कोई परिवार नहीं है या जो अकेले जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

जिनका परिवार होते हुए भी अंतिम संस्कार के लिए कोई तैयार नहीं (Neglected by Family)

पारिवारिक विवाद या रिश्तों की कड़वाहट के कारण जिनका परिवार अंतिम संस्कार करने से इनकार कर देता है।

वे लोग जो अपने अंतिम संस्कार की योजना पहले से बनाना चाहते हैं (Pre-Planned Last Rites)

जो लोग चाहते हैं कि उनकी अंतिम यात्रा उनकी इच्छानुसार संपन्न हो।

बेघर, अनाथ, और समाज से कटे हुए लोग (Homeless & Destitute)

सड़क पर रहने वाले लोग, जिनका कोई सहारा नहीं है।

दुर्घटना या अन्य अप्रत्याशित कारणों से मृत लोग (Unclaimed Bodies & Accidental Deaths)

अस्पतालों या पुलिस द्वारा अधिग्रहित लावारिस शव, जिनके परिजनों का पता नहीं चल पाता।