
जो लोग शारीरिक रूप से अक्षम हैं, लेकिन खाटू श्याम जी या अन्य तीर्थ स्थलों की यात्रा का संकल्प लेना चाहते हैं, उनके लिए हमने 'पदयात्रा प्रतिदिन' सेवा शुरू की है। इस सेवा के तहत, ब्राह्मणों द्वारा आपकी ओर से प्रतिदिन संकल्प पद्धति के द्वारा पदयात्रा करवाई जाती है, जिससे आपका संकल्प पूर्ण होता है और आपकी श्रद्धा को साकार रूप मिलता है।
पदयात्रा सनातन धर्म में केवल एक शारीरिक यात्रा नहीं, बल्कि मानसिक, आत्मिक और आध्यात्मिक शुद्धि की साधना मानी गई है। यह भक्ति, तपस्या और संकल्प का मार्ग है, जिसका उल्लेख वेदों, उपनिषदों, पुराणों और महाकाव्यों में विस्तार से मिलता है।
ऋग्वेद (10.33.1):
"यत्र नार्यः पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।"
अर्थ: जहाँ श्रद्धा और भक्ति से धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं, वहाँ देवताओं का वास होता है।
पदयात्रा एक ऐसा भक्ति मार्ग है, जिसमें व्यक्ति शरीर और मन दोनों से तप करता है और देवकृपा का पात्र बनता है।
छांदोग्य उपनिषद (8.5.4):
"तपोऽपि तप्येत, यत्र यत्र ध्यानं तत्सर्वं पवित्रं भवति।"
अर्थ: जहाँ तप और ध्यान किया जाता है, वहाँ पवित्रता स्वतः प्राप्त होती है।
पदयात्रा को तपस्या के समान माना गया है, क्योंकि इसमें आत्मसंयम, साधना और निरंतर भक्ति निहित होती है।
महाभारत (वनपर्व, अध्याय 82, श्लोक 8–9):
"पद्भिः तीर्थानि गन्तव्यं स्नात्वा धर्मफलप्रदम्।
दर्शनात् पापसंहारं तीर्थयात्रा कृता भवेत्॥"
अर्थ: तीर्थों की पदयात्रा से पुण्य प्राप्त होता है, स्नान से धर्म की सिद्धि होती है और दर्शन से पापों का नाश होता है।
महाभारत (अनुशासन पर्व, 106.28):
"पुण्यानि तीर्थानि समाससाद्य, भुक्त्वा च तेषां फलमद्भुतानि।"
अर्थ: तीर्थ यात्रा और वहाँ की साधना से अद्भुत पुण्यफल की प्राप्ति होती है।
गरुड़ पुराण (पूर्व खंड, अध्याय 106, श्लोक 7–8):
"गङ्गादि तीर्थेषु पदयात्रा कृत्वा, सर्वपापं विनश्यति।"
अर्थ: गंगा एवं अन्य तीर्थों की पदयात्रा करने से समस्त पापों का नाश हो जाता है।
यह श्लोक दर्शाता है कि पदयात्रा आत्मशुद्धि का सर्वोत्तम साधन है।
स्कंद पुराण (काशी खंड, अध्याय 26, श्लोक 32):
"यः पद्भिः काशिं याति स सर्वपापविमुक्तः।"
अर्थ: जो व्यक्ति पैदल काशी की यात्रा करता है, वह समस्त पापों से मुक्त हो जाता है।
पदयात्रा को यहाँ मोक्ष प्राप्ति का साधन बताया गया है।
एक संकल्प, अनगिनत पुण्य – जब आप नहीं चल सकते, हम आपकी आस्था को आगे बढ़ाते हैं।
हम 'पदयात्रा प्रतिदिन' सेवा की शुरुआत रिंगस से खाटू श्याम जी तक प्रतिदिन पदयात्रा के रूप में कर रहे हैं। खाटू श्याम जी की यात्रा हर भक्त की आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है, लेकिन कई भक्त स्वयं यह यात्रा करने में असमर्थ होते हैं।
जो भी भक्त इस सेवा में संकल्प लेते हैं, उनके नाम से तीर्थयात्रा और दान होने के कारण उनकी आत्मा को शुद्धि और मोक्ष का मार्ग मिलता है। शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति स्वयं तीर्थ नहीं जा सकता, वह किसी को भेजकर भी उतना ही पुण्य अर्जित करता है।
इस सेवा में भाग लेने के लिए भक्तों को मासिक संकल्प राशि देनी होगी।